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मौलिक अधिकार ओर मौलिक कर्तव्य – Maulik Adhikar Maulik Kartavya

Fundamental Rights and Fundamental Duties Of India Hindi

भारत के मौलिक अधिकार ओर मौलिक कर्तव्य – आज हम आपको भारत के मौलिक अधिकार और भारतीय मौलिक कर्तव्य के बारे में पूरी जानकारी देना की कोशिस करेंगे. मौलिक अधिकार व मौलिक कर्तव्य यह दो अलग अलग बात है, मौलिक अधिकार भारत द्वारा भारत के नागरिको को आध्यात्मिक विकास के लिए दिये जाते ओर मौलिक कर्तव्य में भारत के प्रत्येक नागरिक को कुछ नियमो का पालन करना होता है.

भारत में कुल 6 मौलिक अधिकार हे जो ये की भारत के संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12 से 35) में निहित हैं ओर 11 मौलिक कर्तव्य का समावेश हे जो की संविधान के भाग IV-A में निहित हे.

मौलिक अधिकार (Maulik adhikar kise kahate hain)

आजादी से पहले भारत का मौलिक अधिकार , इंग्लैंड का बिल ऑफ राइट्स (1689), संयुक्त राज्य अमेरिका का बिल ऑफ राइट्स (1787) ओर फ्रांस के घोषणा पत्र जैसे ऐतिहासिक उदाहरणों से प्रेरित था. मौलिक अधिकारो का विकास भारत की संविधान सभा द्वारा किया गया था जो की दिसंबर 1946 को सच्चिदानंद सिन्हा की अस्थायी अध्यक्षता में संविधान सभा की पहली बैठक हुई थी, उसके बाद राजेंद्र प्रसाद को इसका अध्यक्ष बनाया गया. उसके बाद विभिन्न व्यक्तियों को संविधान और राष्ट्रीय कानूनों के विकास के लिए जिम्मेदारी के पदों पर नियुक्त किया गया जिसमे भीमराव रामजी अम्बेडकर को ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया ओर जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल को विभिन्न विषयों के लिए जिम्मेदार समितियों और उप-समितियों का अध्यक्ष बनाया गया.
मसौदा समिति द्वारा अंतिम ड्राफ्ट 26 जनवरी 1449 को तैयार किए गए था, जो की भारत संविधान का है.

भारतीय मौलिक कर्तव्य – 26 जनवरी 1449 के सविधान ड्राफ्ट में मौलिक कर्तव्य का कोई उल्लेख नहीं मिलता है. ,मौलिक कर्तव्यों को बाद में 1976 में 42 वें संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया था.

मौलिक अधिकार (Maulik Adhikar Hindi)

1)समानता का अधिकार
2)स्वतंत्रता का अधिकार
3)शोषण के खिलाफ अधिकार
4)धर्म का स्वतंत्रता का अधिकार
5)सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
6)संवैधानिक उपचार का अधिकार

मौलिक कर्तव्य (Maulik Kartavya)

(1) प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र गान का आदर करें.
(2) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करनेवाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे.
(3) भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे.
(4) देश की रक्षा करे.
(5) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे.
(6) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका निर्माण करे.
(7) प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसका संवर्धन करे.
(8) वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करे.
(9) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे.
(10) व्यक्तिगत एवं सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे.
(11) माता-पिता या संरक्षक द्वार 6 से 14 वर्ष के बच्चों हेतु प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना.

मौलिक अधिकारों और मौलिक कर्तव्यों के बीच अंतर

मौलिक अधिकारमौलिक कर्तव्य
मौलिक अधिकार, भारत के संविधान के अनुच्छेद 12-35 से संबंधित हैंमौलिक कर्तव्य भारत के संविधान के भाग IV A में निहित अनुच्छेद 51-A से संबंधित हैं
मौलिक अधिकार भारत के नागरिको का अधिकारमौलिक कर्तव्य भारत के नागरिको का कर्तव्य
मौलिक अधिकार निरपेक्ष नहीं हैं क्योंकि उन्हें नियंत्रित किया जा सकता हे, ताकि नागरिको का विकास हो सकेमौलिक कर्तव्य प्रकृति में निरपेक्ष हैं, इसमें नागरिक का कर्तव्य होता हे की वो नियम का पालन करे.
मौलिक अधिकार को सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के माध्यम से लागु किया जा सकता हे.न्यायालयों के माध्यम से मौलिक कर्तव्यों को लागू नहीं किया जा सकता है.
मौलिक अधिकार मूल संरचना के अधीन है, इन्हे पालन करना आवश्यक हे।मौलिक कर्तव्य पूरी तरह से अमनकारी हैं
मौलिक अधिकार राजनीतिक और सामाजिक चरित्र हैं.मौलिक कर्तव्य राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक चरित्र में हैं।

मौलिक अधिकारों फायदे

1.भारत का सविधान भारत के सभी नागरिको को मौलिक अधिकार प्रदान करता हे.
2.मौलिक अधिकार नागरिको को सशक्त व समर्थ जनता है.
3.मौलिक अधिकार हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है.
4.मौलिक अधिकार लोगों की गरिमा को बढ़ाता है.

मौलिक कर्तव्यों फायदे

1.मौलिक कर्तव्य, हर नारिक को अनुशासन का पालन करना सिखाता हे.
2.मौलिक कर्तव्य हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए यह बताता है.
3. कानून का पालन नागरिको को सशक्त बनता हे.

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