स्वास्थ्य

पीलिया के लक्षण और घरेलू इलाज

Jaundice Symptoms and Treatment Hindi

इस पोस्ट मी हम पीलिया का इलाज जानेंगे. पीलिया रोग अधिकांशतः पानी की अशुद्धि के कारण होता है, रक्त में बिलीरुबिन के निर्माण के कारण पीली त्वचा होती है, हम इसे पीलिया कहते है.इस कारण शरीर में पीला पन आ जाता है और सबसे पहले आखों में पीला पन आता है. उसके साथ साथ शरीर और मूत्र भी पीला हो जाता है. कड़वा होना, नाड़ी की गति धीरे चलना,भूख न लगना, भोजन को देखकर उल्टी आना, मुँह का स्वाद कड़वा होना आदि इसके लक्षण हैं. यह रोग आमतौर पर स्वस्थ या नवजात शिशुओं में सामान्य है और आमतौर पर अपने आप ही ढिक हो जाता है ( डॉक्टर का परामर्श जरुरी है).

नोट – स्वस्थ या नवजात शिशुओं में पीलिया के लक्षण पाये जाये तो डॉक्टर का परामर्श जरुरी है.

पीलिया के लक्षण

  • शरीर में पीलापन आना
  • आखों में पीलापन
  • मूत्र पीला होना
  • नाखून पिले होना
  • मुँह का स्वाद कड़वा होना
  • भूख न लगना

पीलिया के कुछ घरेलू उपचार

1.गिलोय का चूर्ण एक-एक चम्मच रोज सुबह-शाम सादे पानी के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है
2.एक चुटकी छोटी हरड़ का चूर्ण शहद के साथ चाटने से पीलिया में आराम मिलता है.
3.एक तोला सौंठ का चूर्ण शहद केसाथ मिलाकर सुबह-शाम उपयोग करें.
4.बेल के पत्तों का रस निकालकर चुटकी भर काली मिर्च का चूर्ण मिलाएं और दिन में सुबह और शाम दो-दो चम्मच पीयें.
5.प्याज को बारीक काटकर नींबू के रस या सिरके में डालकर खाने से भी लाभ होता है.
6.आलुबुखारा खाने से पीलिया में आराम मिलता है.
7.त्रिफला चूर्ण का काढा बनाएँ उसमें मिश्री और घी मिलाकर सेवन करें उसे भी आराम मिलता है.
8.कडवे नीम के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसमें मिश्री मिलाकर गरम करें,ठंडा होने पर रोगी को पिलायें

पीलिया किस कारण से होता है?

पीलिया बिलीरुबिन उत्पादन में तीन चरणों में से किसी में एक समस्या के कारण हो सकता है.

बिलीरुबिन के बढ़ते स्तर के कारण आपको अपराजित पीलिया कहा जाता है:

1.एक बड़े हेमेटोमा की पुनर्संरचना (त्वचा के नीचे खून का थक्का या आंशिक रूप से थक्का जमना)।
2.हेमोलिटिक एनीमिया (रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर दिया जाता है और उनके सामान्य जीवनकाल समाप्त होने से पहले रक्तप्रवाह से हटा दिया जाता है.
3.बिलीरुबिन के उत्पादन के दौरान , पीलिया के कारण हो सकता है.
4.वायरस, हेपेटाइटिस ए, क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और सी, और एपस्टीन-बार वायरस संक्रमण (संक्रामक मोनोन्यूक्लिओसिस) सहित.
5.शराब.
6.ऑटोइम्यून विकार.
7.दुर्लभ आनुवंशिक चयापचय दोष.
8.एसिटामिनोफेन विषाक्तता, पेनिसिलिन, मौखिक गर्भ निरोधकों , क्लोरप्रोमाज़िन और एस्ट्रोजेनिक या एनाबॉलिक स्टेरॉयड सहित दवाएं.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button